Friday, December 11, 2009

एक देशभक्त ने रास्ट्र की स्वतंत्रता के लिए प्राण देने वालो के लिए अपने उदगार इस तरह प्रकट किए कि--शहीदों की चिताओं पैर हर वर्ष मेले लगते रहेंगे और जो वतन पर मर मिटे यही उनकी देश में निशानी होगी ,पर मुझे एसा लगता है की जब भारत स्वतंत्र हो गया तो देश वासी कुछ शहीदों को तो याद करते रहे लकिन कुछ को भूल गए
हम यहाँ एशे ही कुछ भूले हुए शहीदों को याद करेंगे .......मेरा साथ देना
एक क्रांतिकरी फांसी से पहले एक गीत गया था की .......देशवासियों जब जब आजादी का जश्म मानोगे हमें भी याद कर लेना

जरा याद करो इन्हे भी .......

Thursday, December 10, 2009

"अगर महारास्ट मराठीयो के लिए है और कश्मीर कश्मीरीयो के लिए है तो भारतीयों का भारत कहाँ है।"...सशी थारूप

"गाँधी जी ने कहा था की काम ही पूजा है और हम उनके जमदिन पर छुटी का मजा लेते है ".....शशि थारूप

"लोग कह रहे हँ क़ि पाकिस्तान में एक भारतीय सरबजीत को फांसी पर मत लटकाओ और दूसरी तरफ़ एक पाकिस्तानी अफज़ल को लटकाने क़ि मांग कर रहे है .............यह ठीक नही है।".......शिवराज पाटिल

"मेने इश्वर (क्रिकेट के शहंशाह सचिन तेंदुलकर ) को खेलते देखा है। वह भारत कीतरफ़ से चोथे नम्बर पर बलेबजी करता है।