एक देशभक्त ने रास्ट्र की स्वतंत्रता के लिए प्राण देने वालो के लिए अपने उदगार इस तरह प्रकट किए कि--शहीदों की चिताओं पैर हर वर्ष मेले लगते रहेंगे और जो वतन पर मर मिटे यही उनकी देश में निशानी होगी ,पर मुझे एसा लगता है की जब भारत स्वतंत्र हो गया तो देश वासी कुछ शहीदों को तो याद करते रहे लकिन कुछ को भूल गए
हम यहाँ एशे ही कुछ भूले हुए शहीदों को याद करेंगे .......मेरा साथ देना
एक क्रांतिकरी फांसी से पहले एक गीत गया था की .......देशवासियों जब जब आजादी का जश्म मानोगे हमें भी याद कर लेना
जरा याद करो इन्हे भी .......
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